हमारे बारे में

किसान मजदूर सेना का गठन श्रावण महीने में सन २०१७ ई. संवत २०७८ में कर्णावती महानगर में एक विशाल किसानों व मजदूरों के सम्मेलन में किया गया । यह संगठन एक राष्ट्रीय स्तर की गैर सरकारी व अराजनैतिक स्वयं सेवकों का संगठन है जो कि देश के किसानों और मजदूरों के हितों के लिए कार्य करेगा। सम्पूर्ण राष्ट्र के किसानों और मजदूरों को एक मंच पर लाकर उनकी बौद्धिक, सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए यह संगठन कार्य करेगा। जाति-पांति, छुवा-छूत के बंधन को ख़त्म करते हुए अखंड-भारत और श्रेष्ठ भारत का निर्माण करने में राष्ट्र के सभी किसान – श्रमिक एक होकर कार्य करेंगे और राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ अपने आपको देश के अन्दर अग्रणी श्रेणीं में स्थापित करेंगे।

हमारा ध्याय/उद्देश

(क)   किसानों और श्रमिकों को उनकी बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक उन्नति  हेतु संगठित एवं प्रेरित करना।

(ख)  समाज की एकात्मता तथा पारस्परिक सद्भावना के लिये छुआछूत और ऊंच-नीच की भेदभाव पूर्ण कुरीतियों का उन्मूलन कर सामाजिक समरसता विकसित करना।

(ग)   किसानों और श्रमिकों को भय, प्रलोभन, नासमझी या अपने ही लोगों के दुर्व्यवहार आदि किसी भी कारण से जो लोग दबे और कुचले हैं इन सभी बन्धुओं  का मार्ग प्रशस्त करना व उनको विकास की मुख्य धरा से जोड़ना।

(घ) किसी भी उम्र या लिंग के गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगे, गो-पालन एवं गो-संवर्धन बढ़े इसके लिये विधायी प्रयत्न एवं जागरण करना।

(ड़)  दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी  किसान-श्रमिक में ह्रदय में देशकालोचित, राष्ट्रभावना को जागृत करना ।

(च) वे किसान-श्रमिक जो गांव, नगर, वनांचल या दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में अपने जो बन्धु सम्पर्क के अभाव में अलग-थलग पड़ गये हैं उन बन्धुओं को राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा में जोड़ने हेतु विधि सम्मत सभी उपाय करना।

(छ) देश के सभी किसानों-श्रमिकों तक उनसे सम्बंधित योजनाओं, नई तकनीक, नियम और कानून को पहुंचाकर लाभान्वित करना।

(ज) उत्पीड़न एवं शोषण की शिकार अथवा स्वास्थ्य, गरीबी या अन्य किसी कारण से असहाय एवं पीड़ित माताओं, बहनों, बड़े-बूढ़ों को आवश्यकतानुसार सेवा एवं सहायता देना।

(ञ) किसानों और मजदूरों के विरुद्ध हो रहे राष्ट्रव्यापी भ्रष्ट्राचार का उन्मूलन एवं उसे नियंत्रित करने के लिये योजनाबद्ध ढंग से संगठित प्रयास करना।

(ट) भारत को यथाशीघ्र एक विकसित समृद्ध राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित करने में सहयोगी बनना और स्वयं को समाज के उच्च शिखर पर स्थापित करना।

(ठ) किसान-मजदूर के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वावलम्बी बनाने तथा रोजगार से जोड़ने के लिये प्रशिक्षण एवं शिक्षण संसथान का संचालन करना अथवा किसी भी शैक्षणिक संगठन, विश्वविद्यालय आदि के साथ जुड़कर सरकारी-गैरसरकारी स्तर पर यथासम्भव अवसर एवं सहायता उपलब्ध कराना।

(ड) समान विचारधारा के सभी संगठनों में आपसी समन्वय स्थापित करना तथा समान विचारधारा वाले राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से सम्बद्धता प्राप्त कराना।

(ढ़)  उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिये आवश्यकतानुसार कोई भी छोटा-बड़ा अनुषांगिक संगठन, संगठनन या प्रकल्प स्थापित करना। साहित्य, मुद्रण और प्रकाशन प्रारम्भ करना तथा ‘‘भारतीय किसान-मजदूर कोष’की स्थापना करना।

(ण)   विधि, धरना, अनशन का सहारा लेते हुए किसानों और श्रमिकों के शोषण व उन पर होने वाले अत्याचारों कों  पूर्ण रूप से  रोकना।

(त)  श्रमिकों/कर्मचारियों को स्थायी काम, उचित मजदूरी/वेतन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा व लाभ दिलवाने के लिए आवश्यक प्रयास करना।

(थ)   किसानों के फसल का उचित मूल्य, मुवावजा, छूट, और समान आमदनी दिलवाने के लिए आवश्यक प्रयास करना।

(द) श्रमिकों और किसानो के लिए जन जागरण अभियान चलाकर उनको गरीबी और लाचारी देने वाले लोगों और कारणों के बारे में जागरूक करना तथा वे किस प्रकार अपने आप को विकसित बना सकें उसके लिए प्रयास करना।

(न) स्कूल, विद्यालय, संस्कार केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र, आयुर्वेद विद्यालय, चिकिस्ता केंद्र आदि का संचालन करना।

(प) आर.टी.आई / पी.आई.एल. के माध्यम से भरष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ना।

(फ) बाल श्रम, न्यूनतम मजदूरी कानून व महिला कर्मचारी कानून का कडाई से पालन हो इसके लिए प्रयत्न करना।

(ब) कृषि शोध संसथान की स्थापना करके देशी पद्धति से कृषि का विकास करना।